भारत में इलाज महँगा क्यों है? इस सवाल का एक बड़ा जवाब है—विदेशी मेडिकल मशीनों पर निर्भरता। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। हाल ही में भारत ने मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक ऐसा कदम उठाया है, जिसे आने वाले वर्षों में “गेम-चेंजर” कहा जाएगा। देश की पहली स्वदेशी MRI मशीन तैयार हो चुकी है और इसे देश के सबसे भरोसेमंद संस्थान AIIMS Delhi में लगाया भी जा चुका है।यह सिर्फ़ एक मशीन नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जिसमें कहा गया था- हम बना सकते हैं, हम कर सकते हैं।
विदेशी MRI का दबदबा टूटा, अब आधी कीमत में स्कैन
अब तक भारत अपने 80% से ज़्यादा मेडिकल उपकरण बाहर से मंगाता रहा है। MRI मशीनें तो और भी महँगी- कई बार कीमत करोड़ों में पहुँच जाती है। इसका सीधा असर मरीज पर पड़ता है, क्योंकि स्कैन के पैसे भी ज़्यादा होते हैं।
नई स्वदेशी MRI मशीन की सबसे बड़ी ताक़त इसकी कम कीमत है। बताया जा रहा है कि यह विदेशी मशीनों के मुक़ाबले करीब आधी लागत में उपलब्ध होगी। मतलब साफ़ है- अस्पतालों का खर्च घटेगा और आम आदमी के लिए MRI कराना पहले से कहीं आसान होगा।
बिना हीलियम वाली तकनीक: खर्च भी कम, झंझट भी कम
पारंपरिक MRI मशीनों में तरल हीलियम की ज़रूरत होती है, जो न सिर्फ़ महँगा है बल्कि दुनिया में सीमित मात्रा में मिलता है। यही वजह है कि मेंटेनेंस भी सिरदर्द बन जाता है।
देसी इंजीनियरों ने इस समस्या का सीधा समाधान निकाला- हीलियम पर बहुत कम निर्भरता। इसका फायदा यह हुआ कि मशीन चलाने और संभालने की लागत काफी घट गई। 1.5 टेस्ला क्षमता वाली यह मशीन इमेज क्वालिटी के मामले में भी किसी विदेशी MRI से कम नहीं मानी जा रही।
AIIMS से शुरुआत, देशभर में पहुंचेगी तकनीक
AIIMS दिल्ली में इंस्टॉलेशन सिर्फ़ एक शुरुआत है। यहां सफल इस्तेमाल के बाद यही मशीन देश के दूसरे सरकारी और निजी अस्पतालों तक पहुंचेगी। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी, बल्कि भारत की पहचान एक ग्लोबल मेडिकल-टेक हब के रूप में भी मजबूत होगी।
