पत्थरों की दीवारों में दफन हैं हज़ारों जन्मों की खुशियाँ और कई परिवारों के जख्म, 2012 के बच्चा चोरी कांड से 2017 की ‘टूटी सुई’ वाली घटना तक, सुल्तानिया पर उठे गंभीर सवाल
भोपाल, मध्य प्रदेश: झीलों की नगरी भोपाल में स्थित ‘सुल्तानिया जनाना अस्पताल’ केवल एक सरकारी अस्पताल नहीं, बल्कि एक जीवंत इतिहास है। 19वीं सदी की शुरुआत में नवाब सुल्तान जहाँ बेगम ने जिस इमारत को महिलाओं की सुरक्षा और सेहत के लिए बनवाया था, वहीं इमारत पिछले दो दशक में खौफनाक लापरवाही और सनसनीखेज वारदातों का केंद्र बन गई।
पर्दानशीं औरतों के लिए बना था लेडी अस्पताल
सुल्तानिया अस्पताल की नींव नवाबों के दौर में रखी गई थी। उस जमाने में यह अस्पताल आधुनिकता और नवाबी वास्तुकला का बेजोड़ नमूना था। यह उन चुनिंदा जगहों में से एक था जहाँ भोपाल की रियासती महिलाओं को विशेषज्ञों की देखरेख में इलाज मिलता था। पत्थर की उन मजबूत दीवारों के बीच हजारों बच्चों ने जन्म लिया, लेकिन समय के साथ उन दीवारों में ऐसी चीखें दफन हुईं जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया।
वारदात 1: जब गायब हुआ ‘कलेजे का टुकड़ा’ (बच्चा चोरी कांड, 2012)
अस्पताल की साख पर सबसे गहरा जख्म 30 अप्रैल 2012 को लगा। राजगढ़ की रहने वाली लक्ष्मी प्रजापति ने एक बेटे को जन्म दिया था। खुशियां अभी शुरू ही हुई थीं कि तभी एक अज्ञात महिला—जो खुद को अस्पताल का स्टाफ बता रही थी—ने बड़ी चालाकी से पिता को बाजार भेजा और माँ की झपकी लगते ही नवजात को लेकर चंपत हो गई। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना ने अस्पताल की लचर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी। कई दिनों के हंगामे और पुलिसिया घेराबंदी के बाद बच्चे को बरामद तो कर लिया गया, लेकिन सुल्तानिया का ‘सुरक्षित’ होने का भ्रम हमेशा के लिए टूट गया।
वारदात 2: जिस्म में फंसी ‘लोहे की मौत’ (सितंबर 2017)
लापरवाही की इंतहा तब हुई जब सितंबर 2017 में 23 वर्षीय राखी गनोता के सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने एक बड़ी चूक कर दी। स्पाइनल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन देते समय सुई (Needle) का एक हिस्सा टूटकर महिला की रीढ़ की हड्डी में ही रह गया।
मेडिकल डायलॉग्स की रिपोर्ट के अनुसार, वह महिला 16 घंटे तक दर्द से तड़पती रही, लेकिन स्टाफ उसे ‘सामान्य दर्द’ कहकर चुप कराता रहा। जब एक्स-रे हुआ तो सच्चाई देख सबके होश उड़ गए। दोबारा ऑपरेशन कर सुई निकाली गई, लेकिन इस घटना ने डॉक्टरों की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया।
नया पता, क्या बदली नीयत?
करीब 100 साल पुरानी जर्जर इमारत और इन काले अध्यायों को पीछे छोड़ते हुए, प्रशासन ने सितंबर 2022 में सुल्तानिया अस्पताल को पूरी तरह से हमीदिया अस्पताल के नए 11 मंजिला परिसर में शिफ्ट कर दिया। 12 सितंबर से यहाँ ओपीडी शुरू हुई और 19 सितंबर तक पूरी शिफ्टिंग पूरी कर ली गई। अब जच्चा और बच्चा का इलाज एक ही छत के नीचे आधुनिक मशीनों के बीच होता है।
चमकती दीवारों के पीछे दबा सवाल
सुल्तानिया का नया पता बदल गया है, मशीनें आधुनिक हो गई हैं और सुरक्षा के लिए गार्ड्स की फौज खड़ी है। लेकिन क्या महज़ इमारत बदल देने से सिस्टम की वो पुरानी बीमारियाँ ठीक हो जाएँगी? सुल्तानिया का इतिहास हमें याद दिलाता है कि लापरवाही की कीमत एक माँ की ममता और एक मरीज की जान होती है। आज जब हम इस नए परिसर को देखते हैं, तो सवाल वही खड़ा होता है—क्या अब यहाँ की दीवारें केवल खुशियों की गवाह बनेंगी या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा?
