तनु सिंह की रिपोर्ट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश कर दिया है। ‘कर्तव्य भवन’ में तैयार इस बजट को सरकार ने ‘विकसित भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। सरकार का दावा है कि यह बजट युवा शक्ति, गरीब और वंचित समुदायों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
लेकिन जब हम सरकारी दावों से हटकर आंकड़ों को ध्यान से देखते हैं, तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है। एक तरफ़ कुछ वर्गों को राहत मिलती दिखती है, तो दूसरी तरफ़ कई अहम योजनाओं में कटौती और शेयर बाज़ार की नाराज़गी भी साफ़ दिखाई देती है।
तो आइए, आंकड़ों के साथ समझते हैं कि इस बजट में किसे क्या मिला, किसे क्या नहीं मिला, और सरकार के सामने असली चुनौतियां क्या हैं।
सकारात्मक पक्ष: कहाँ मिली राहत?
1. मध्यम वर्ग और टैक्स
मध्यम वर्ग के लिए यह बजट कुछ हद तक सुकून लेकर आया है। सरकार ‘नया आयकर अधिनियम (इंकम टैक्स एक्ट), 2025’ लेकर आई है, जो अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसका मकसद टैक्स नियमों और फॉर्म को इतना आसान बनाना है कि आम नागरिक को किसी टैक्स एक्सपर्ट के पास जाने की ज़रूरत न पड़े।
इसके अलावा, विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाला ‘स्रोत पर कर संग्रह’ (TCS) भी बड़ी राहत लेकर आया है। इसे पहले के 5% और 20% से घटाकर अब सिर्फ़ 2% कर दिया गया है।
2. युवा और शिक्षा
सरकार ने डिजिटल भविष्य पर बड़ा दांव लगाया है। एनीमेशन और गेमिंग (AVGC) सेक्टर में 2030 तक 20 लाख नौकरियों की ज़रूरत को देखते हुए 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में ‘कंटेंट क्रिएटर लैब’ बनाई जाएंगी।
युवाओं के कौशल विकास के लिए ‘स्किल इंडिया कार्यक्रम’ को 2,800 करोड़ रुपये दिए गए हैं। साथ ही, फार्मा और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) भी खोले जाएंगे।
3. महिलाएं और स्वास्थ्य
महिलाओं से जुड़े मोर्चे पर भी कुछ अहम घोषणाएं की गई हैं। छात्राओं के लिए देश के हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल बनाया जाएगा। वहीं, महिला उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिए ‘शी-मार्ट्स’ (She-Marts) नाम से रिटेल आउटलेट शुरू किए जाएंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर और मधुमेह की 17 दवाओं पर सीमा शुल्क (Customs Duty) पूरी तरह हटा दिया गया है। इसके अलावा, उत्तर भारत में एक नया मानसिक स्वास्थ्य संस्थान ‘निमहांस-2’ (NIMHANS-2) खोलने की भी घोषणा हुई है।
4. किसान और खेती
खेती को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने ‘भारत-विस्तार’ (Bharat-VISTAAR) नाम का एक एआई टूल लॉन्च किया है। ‘कृषोन्नति योजना’ के लिए आवंटन बढ़ाकर 11,200 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 500 नए ‘अमृत सरोवर’ और जलाशयों के विकास की भी बात कही गई है।
5. इंफ्रास्ट्रक्चर
इंफ्रास्ट्रक्चर इस बजट का सबसे मजबूत स्तंभ माना जा रहा है। ‘पूंजीगत व्यय’ (Capital Expenditure) को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
इसके तहत मुंबई-पुणे और दिल्ली-वाराणसी जैसे सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिनसे लंबे समय में रोज़गार बढ़ने की उम्मीद है।
नकारात्मक पक्ष: कहाँ लगी चोट?
1. ग्रामीण रोज़गार पर संकट
बजट का सबसे विवादित पहलू मनरेगा (MGNREGA) के फंड में की गई भारी कटौती है। वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह राशि 88,000 करोड़ रुपये थी, जिसे अब घटाकर सिर्फ़ 30,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
हालांकि सरकार ने इसकी जगह ‘विकसित भारत – रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB-G RAM G) के लिए 95,692 करोड़ रुपये रखे हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका असर कैसा होगा, इसे लेकर देशभर में संशय बना हुआ है।
2. शेयर बाज़ार और निवेश
ट्रेडिंग करने वालों के लिए यह बजट निराशाजनक रहा। वायदा और विकल्प (F&O) में ‘प्रतिभूति लेनदेन कर’ (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है।
इस घोषणा के तुरंत बाद शेयर बाज़ार में भारी गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।
3. प्रदूषण पर चुप्पी
भारत में प्रदूषण एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल जैसा मुद्दा बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण के लिए बजट सिर्फ़ 1,091 करोड़ रुपये रखा गया है। यह राशि पिछले साल के 1,300 करोड़ रुपये (संशोधित अनुमान) से भी कम है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वित्त मंत्री के पूरे भाषण में इस गंभीर समस्या पर कोई खास ज़िक्र तक नहीं हुआ।
चुनौतियां और विश्लेषण
सरकार ने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3% तक लाने का लक्ष्य रखा है। आर्थिक अनुशासन के लिहाज़ से यह ज़रूरी है, लेकिन इसकी कीमत कई जनकल्याणकारी योजनाओं में कटौती के रूप में चुकानी पड़ी है।
एक और चिंताजनक सच यह है कि सरकार की कुल कमाई का करीब 20% हिस्सा – यानी हर 1 रुपये में से 20 पैसे – सिर्फ़ पुराने कर्ज़ का ब्याज चुकाने में चला जाता है।
युवाओं के लिए 20 लाख नौकरियों और कौशल विकास के वादे सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन सीएजी (CAG) की पिछली रिपोर्ट्स बताती हैं कि ऐसी योजनाओं में प्लेसमेंट की दर सिर्फ़ 41% रही है।
इस रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े और घोषणाएं भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज़ों और प्रेस विज्ञप्तियों पर आधारित हैं। बजट से जुड़ी विस्तृत और प्रमाणिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए आधिकारिक लिंक देखें:
