नमन मिश्रा की रिपोर्ट:
भोपाल। डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ देश में मोबाइल इंटरनेट उपयोग अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। टेलीकाम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) और मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MOSPI) से जुड़े विभिन्न सरकारी अध्ययनों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत में प्रति व्यक्ति औसत मासिक डेटा खपत 27.5 जीबी तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा बीते वर्षों की तुलना में तेज़ वृद्धि को दर्शाता है और इसमें सबसे बड़ी भूमिका 15–24 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है।
युवाओं के दम पर बढ़ी खपत
सरकारी सर्वे बताते हैं कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 15–24 वर्ष आयु वर्ग के 96 से 99 प्रतिशत युवा मोबाइल डेटा के जरिए इंटरनेट से जुड़े हैं। यह संकेत देता है कि इंटरनेट अब केवल शहरी सुविधा नहीं रह गया, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अंचलों तक इसकी पहुंच व्यापक हो चुकी है। स्मार्टफोन की बढ़ती उपलब्धता, किफायती डेटा पैक और क्षेत्रीय भाषा कंटेंट ने युवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़े रखा है। परिणामस्वरूप शिक्षा, मनोरंजन, भुगतान और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।
पिछले पांच वर्षों में कितनी बढ़ी खपत (प्रतिशत में)
आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2020–21 में औसत मासिक डेटा खपत 12.11 जीबी थी। यह 2021–22 में 14.89 जीबी पहुंची—यानी करीब 23% की वृद्धि। 2022–23 में खपत 17.02 जीबी रही, जो पिछले वर्ष से लगभग 14% अधिक थी। 2023–24 में यह 19.30 जीबी हो गई—लगभग 13% की बढ़ोतरी। 2024–25 में औसत 21.53 जीबी दर्ज की गई, जो साल-दर-साल 11–12% की वृद्धि को दर्शाती है। वहीं 2025 में यह छलांग लगाकर 27.5 जीबी तक पहुंच गई—यानी 2024–25 की तुलना में करीब 28% का उछाल। कुल मिलाकर, पांच वर्षों में प्रति व्यक्ति मासिक डेटा खपत दो गुना से अधिक हो चुकी है।
किस वजह से बढ़ा उपयोग
डेटा खपत में बढ़ोतरी के पीछे कई कारक हैं। सोशल मीडिया, ऑनलाइन वीडियो, शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म और स्ट्रीमिंग सेवाओं पर बढ़ता समय सबसे बड़ा कारण है। इसके साथ ही ऑनलाइन शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और हेल्थ-एजुकेशन प्लेटफॉर्म का नियमित उपयोग भी डेटा खर्च बढ़ा रहा है। सरकारी आकलनों के मुताबिक करीब 80% उपयोगकर्ता प्रतिदिन 1 जीबी या उससे अधिक डेटा का उपयोग कर रहे हैं, जिसमें युवाओं की हिस्सेदारी निर्णायक है।
एमपी–छत्तीसगढ़: उपयोग बढ़ा, टेलीडेंसिटी में चुनौती
हालांकि डेटा उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन टेलीडेंसिटी के मामले में मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़ रीजन अभी भी पीछे है। देश के 22 टेलीकॉम रीजन में यह रीजन 20वें स्थान पर है। इससे नीचे उत्तर प्रदेश 21वें और बिहार अंतिम स्थान पर हैं। यह बताता है कि मोबाइल कनेक्टिविटी और प्रति व्यक्ति कनेक्शन की संख्या अब भी सीमित है। इसके उलट दिल्ली टेलीडेंसिटी में पहले पायदान पर बनी हुई है, जहां प्रति व्यक्ति मोबाइल कनेक्शन सबसे अधिक हैं।
शीर्ष पांच टेलीकॉम रीजन (टेलीडेंसिटी)
- दिल्ली: 277.09
- हिमाचल प्रदेश: 124.52
- कर्नाटक: 112.58
- पंजाब: 112.58
- तमिलनाडु: 104.55
ग्रामीण भारत की डिजिटल छलांग
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। भारतनेट जैसी परियोजनाओं, मोबाइल नेटवर्क विस्तार और सरकारी डिजिटल सेवाओं के कारण गांवों तक कनेक्टिविटी पहुंची है। ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन राशन, डिजिटल स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं ने नियमित इंटरनेट उपयोग की आदत विकसित की है। इसका असर यह है कि ग्रामीण युवा भी शहरी युवाओं की तरह रोज़ाना बड़ी मात्रा में डेटा खर्च कर रहे हैं।
आगे क्या?
आकलन बताते हैं कि आने वाले वर्षों में डेटा कंजंप्शन मौजूदा स्तर से भी अधिक बढ़ेगा। युवाओं का ऑनलाइन इंगेजमेंट बढ़ता जा रहा है और नई डिजिटल सेवाएं लगातार जुड़ रही हैं। फिलहाल किफायती दरों पर उपलब्ध डेटा ने उपयोग की आदत मजबूत की है। हालांकि, भविष्य में कीमतों में बदलाव की संभावना के बीच भी डिजिटल निर्भरता घटने के संकेत नहीं हैं। कुल मिलाकर, 2025 तक भारत में डेटा उपयोग की तस्वीर साफ है- युवा केंद्र में हैं, ग्रामीण इलाकों में तेज़ बढ़त है और एमपी–छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में उपयोग तो बढ़ रहा है, लेकिन कनेक्टिविटी के स्तर पर अभी भी सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।
